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फूटे घड़े की प्यास सा

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अजनबी बनकर चलो
        
                                                    
                            
अनजाने रास्ते ही चुनो
मंजिलें न कोई अपनी
पथ पर बस चलते रहो.

भटकने पर सुख मिले
छांव पाकर दुःख मिले
हाथ में बस हाथ हो
सिर्फ तेरा साथ हो.

गगन संग आँखे मगन
मन भरी तेरी छुअन
साँस में उठती तपन
और धरा का ताप हो.

घाट पर रखा दीया
पपीहे की पिय कहाँ
फूटे घड़े की प्यास सा
दर्द का संताप हो.
-दिनेश चौहान
एक महीने पहले
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