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सावन का दुःख।

BAJRANGI LAL

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सून भयो अंगना सजना बिन कौन सुनै हमरो दुख भारी,
        
                                                    
                            
सावन के मनभावन मौसम कौन भरै हमका अकवारी।
सोवत ना मन रोवत है अब खोवत होश हवास बिचारी,
पावन सावन बीत गयो तुम आए नहीं अबहीं बनवारी।।
- बजरंगी लाल
 
2 महीने पहले
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