सून भयो अंगना सजना बिन कौन सुनै हमरो दुख भारी,
सावन के मनभावन मौसम कौन भरै हमका अकवारी।
सोवत ना मन रोवत है अब खोवत होश हवास बिचारी,
पावन सावन बीत गयो तुम आए नहीं अबहीं बनवारी।।
- बजरंगी लाल
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