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ये ज़िंदगी की कसमकश

Asha Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ये ज़िंदगी की कसमकस
        
                                                    
                            
जीने हमें देती नहीं,
हंसने हमें देती नहीं
रोने हमें देती नहीं।
कब तक मनाए ग़म कोई
कब तक सहे दिल की चुभन,
बदल चुकें जज़्बात पर
कहीं यादों में ख़लिश सी है।
मेरी ख़्वाहिशे पूरी हो अब
दिल ज़िद भी अब करता नहीं,
तुफ़ानों ने समझा दिया
जीवन पे बस चलता नहीं।
तन्हाईयां रूसवाईयां है
खुशियों के है डेरे यहां,
इंसान है मज़बूर सा
है वक्त के फेरे यहां।
किसी ओर से भी गुज़रूं मैं
उलझें से है सब रास्ते
भला ज़िंदगी के काफ़िले
थमी है किसी के वास्ते।।
3 महीने पहले
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