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ख़ुद से पहचान

Asha Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ख़ुद से पहचान होती जाएगी चलते चलते,
        
                                                    
                            
जिंदगी आसान होती जाएगी चलते चलते।

कहीं तो होगा सवेरा अंधेरी रातों का,
मंजर-ए-सहर भी आ जाएगी चलते चलते।

ये ज़िंदगी क्या है ग़म-खुशी का फेरा है,
रफ़्ता-रफ़्ता निकल जाएगी चलते चलते।

सरे-सफर में कोई अपना सा मिल जाएगा,
दिल की बस्ती बस जाएगी चलते चलते।

तमाम हसरतों की आंच में सुलगता सा दिल,
अनंत राहों पे बढ़ जाएगी चलते चलते।।
एक दिन पहले
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