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ख़ुद से पहचान

                
                                                         
                            ख़ुद से पहचान होती जाएगी चलते चलते,
                                                                 
                            
जिंदगी आसान होती जाएगी चलते चलते।

कहीं तो होगा सवेरा अंधेरी रातों का,
मंजर-ए-सहर भी आ जाएगी चलते चलते।

ये ज़िंदगी क्या है ग़म-खुशी का फेरा है,
रफ़्ता-रफ़्ता निकल जाएगी चलते चलते।

सरे-सफर में कोई अपना सा मिल जाएगा,
दिल की बस्ती बस जाएगी चलते चलते।

तमाम हसरतों की आंच में सुलगता सा दिल,
अनंत राहों पे बढ़ जाएगी चलते चलते।।
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18 घंटे पहले

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