विज्ञापन

अब उसकी खामोशी पर

Aryan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वह मौजूद था पर,
        
                                                    
                            
किसी ने देखा नहीं।
वह मुस्कुराता रहा,
किसी ने आँखें पढ़ी नहीं।
उसने बात करनी चाही,
पर किसी के पास वक़्त नहीं था।
एक दिन उसने बोलना ही छोड़ दिया,
कमरे का दरवाज़ा बंद कर लिया,
और सबने कहा—
"यह तो बहुत बदल गया है।"
मजे की बात है,
जब वह जिंदा था, तो कोई नहीं था,
अब उसकी खामोशी पर
सब चर्चा कर रहे हैं।
1 सप्ताह पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

RATAN KUMAR

787 कविताएं

View Profile

Ejaz Ahamad

122 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10805 कविताएं

View Profile