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अब उसकी खामोशी पर

                
                                                         
                            वह मौजूद था पर,
                                                                 
                            
किसी ने देखा नहीं।
वह मुस्कुराता रहा,
किसी ने आँखें पढ़ी नहीं।
उसने बात करनी चाही,
पर किसी के पास वक़्त नहीं था।
एक दिन उसने बोलना ही छोड़ दिया,
कमरे का दरवाज़ा बंद कर लिया,
और सबने कहा—
"यह तो बहुत बदल गया है।"
मजे की बात है,
जब वह जिंदा था, तो कोई नहीं था,
अब उसकी खामोशी पर
सब चर्चा कर रहे हैं।
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4 दिन पहले

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