होते ना पर्वत ते होती ना दौलत
चमत्कारी औषधि है जिनकी बदौलत
हरे भरे खुशहाल
धरा के हैं ऊपर
धरा के है ये भाल
ये नग ये भूधर
निकलती न गंगा न माया ते मोहलत
बसते न शम्भू ते देते न अभिमत
रमते यहा तपश्वी
ला देते क्रांति
हिम जब पिघलती
भू जल ते शांति
उपजाऊ मिट्टी ये खेत खेत भेजत
खुदाई ते इनकी कवि का रक्त खौलत
होते ना पर्वत ते होती ना दौलत
चमत्कारी औषधि है जिनकी बदौलत