आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

होते ना पर्वत ते होती ना दौलत

                
                                                         
                            होते ना पर्वत ते होती ना दौलत
                                                                 
                            
चमत्कारी औषधि है जिनकी बदौलत
हरे भरे खुशहाल
धरा के हैं ऊपर
धरा के है ये भाल
ये नग ये भूधर
निकलती न गंगा न माया ते मोहलत
बसते न शम्भू ते देते न अभिमत
रमते यहा तपश्वी
ला देते क्रांति
हिम जब पिघलती
भू जल ते शांति
उपजाऊ मिट्टी ये खेत खेत भेजत
खुदाई ते इनकी कवि का रक्त खौलत
होते ना पर्वत ते होती ना दौलत
चमत्कारी औषधि है जिनकी बदौलत
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर