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बीतती ज़िंदगी

Arpana Panday

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बस थोड़ा और…
        
                                                    
                            
फिर सब कुछ ठीक होगा,
बस यही सोचते-सोचते
एक दिन ज़िंदगी के आख़िरी पड़ाव पर आ जाएँगे,
और शायद तब भी कुछ ठीक होने का इंतज़ार रहेगा।
-अर्पणा पाण्डेय
14 घंटे पहले
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