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आईए ना हमरा बिहार में

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बुद्ध की धरती
        
                                                    
                            
है नहीं परती
ज्ञान के पेड़ उगा जहां
सारा जहां
उतरा जहां
पावन ज्ञान बांटने वाले हम हैं
पर जरा सा भी नहीं अहं है
उस गया की धरती
जो नहीं है परती
मेरी कर्म स्थली यही है
जानता जिसे मही है
आईए ना हमरा बिहार में
जहां जहाज जईसन उड़े मनवा टूटही कार में।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक महीने पहले
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