बुद्ध की धरती
है नहीं परती
ज्ञान के पेड़ उगा जहां
सारा जहां
उतरा जहां
पावन ज्ञान बांटने वाले हम हैं
पर जरा सा भी नहीं अहं है
उस गया की धरती
जो नहीं है परती
मेरी कर्म स्थली यही है
जानता जिसे मही है
आईए ना हमरा बिहार में
जहां जहाज जईसन उड़े मनवा टूटही कार में।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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