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तदबीर की राह

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिल का जो मशवरा था मानना ही पड़ गया
        
                                                    
                            
अंजाम का हर खयाल टालना ही पड़ गया
नहीं था कोई किशन मुझ पर लड़ाई थोपी गई
मुकाबिल थे अपने हथियार डालना ही पड़ गया
किसको था सब्र राह पर तदबीर की चलता
तकदीर का सिक्का उछलना ही पड़ गया
सम्हाल लोगे तुम,यह सोचकर डगमगाया नहीं
गिरा मैं सच में खुद को संभालना ही पड़ गया
वो कौन थे शराफत से कर गए थे निबाह
अनाड़ी हम हुए आखिर तो हारना ही पड़ गया
मुखौटे लगाकर जीना कभी आसान नहीं था
सूरत को छुपाने को डालना ही पड़ गया
2 महीने पहले
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