क्या वह चाँद, सितारों, प्रेम और ख़ूबसूरत एहसासों की दुनिया है? या वह भूखे आदमी की ख़ाली थाली में झाँकने का साहस भी है?
क्या शायरी का काम सिर्फ़ दिल बहलाना है, या वह उन लोगों की आवाज़ भी बन सकती है, जिनकी आवाज़ सत्ता के गलियारों तक पहुँ...और पढ़ें
कनाडाई कवयित्री, निबंधकार, अनुवादक और क्लासिसिस्ट ऐन पैट्रिशिया कार्सन को 2026 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया है। उन्हें यह सम्मान उनकी ऐसी रचनात्मक दुनिया के लिए मिला है, जिसमें प्राचीन शास्त्रीय परंपरा और समकालीन साहित्य का अनूठा मेल दिखाई द...और पढ़ें
ख़ुशबू नहीं प्यार की महकी जिनके सोच-विचारों में
नागफनी की चुभन मिली उनके दैनिक व्यवहारों में ।
तू पतझर के पीले पत्तों पर पग धरते डरता है
लोग सफलता खोज चुके हैं लाशों के अंबारों में ।
महलों के रहने वाले कुछ...और पढ़ें
गांधी को याद करना आसान है, गांधी को समझना कठिन। हर वर्ष 2 अक्टूबर को हम उनके चित्र पर माल्यार्पण करते हैं, उनके प्रिय भजनों को सुनते हैं और सत्य-अहिंसा के उनके संदेश को दोहराते हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि जिस दुनिया में हिंसा, असहिष्णुता, उपभोग और...और पढ़ें
सत्य, अहिंसा और आज़ादी की लड़ाई—गांधीजी का नाम सुनते ही यही बातें याद आती हैं। लेकिन उनके जीवन में झिझक, गलतियों और सीख के कई ऐसे प्रसंग भी हैं, जिनकी चर्चा कम होती है। गांधी जयंती पर जानिए उनकी अपनी किताबों में दर्ज पांच दिलचस्प बातें।
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1 अक्टूबर 1919 को उत्तर-प्रदेश के सुल्तानपुर में पैदा हुए असरार उल हसन ख़ान एक दिन सिनेमा के नामी गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी होंगे ऐसा उन्होंने ख़ुद भी नहीं सोचा था। एक इंटरव्यू के दौरान मजरूह बताते हैं कि उनके घर में इल्म का कोई माहौल न था। लेकिन वे म...और पढ़ें
मन के मते न चलिये, मन के मते अनेक
जो मन पर असवार है, सो साधु कोई एक ।।
भावार्थ:- मन के मत में न चलो, क्योंकि मन के अनेको मत हैं। जो मन को सदैव अपने अधीन रखता है, वह साधु कोई विरला ही होता है। ...और पढ़ें
एक मनुज संचित करता है अर्थ पाप के बल से
और भोगता उसे दूसरा भाग्यवाद के छल से।
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता में ओज का स्वर ललकार में तब्दील होता है लेकिन उसमें विचार की सम्पदा है, वे श्रम के महत्व को स्वीकार करते हैं भा...और पढ़ें
नवीन सी० चतुर्वेदी एक बहुआयामी व्यक्तित्व हैं। साहित्य-लेखन में चाहे विविध विधाओं का सृजन हो अथवा विभिन्न भाषाओं का, चतुर्वेदी जी की क़लम सबको साधती है। वे अलग-अलग भाषाओं-विधाओं में केवल लिखते भर नहीं, बल्कि पूर्ण अधिकार के साथ रचना करते हैं। हिन्दी क...और पढ़ें
क्या गजब का देश है यह क्या गजब का देश है
बिन अदालत औ मुवक्किल के मुकदमा पेश है
आँख में दरिया है सबके
दिल में है सबके पहाड़
आदमी भूगोल है जी चाहा नक्शा पेश है
क्या गजब का देश है यह क्या गजब का देश है।
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