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हक़ीक़त को भी, फ़साना समझा उसने।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हक़ीक़त को भी, फ़साना समझा उसने।
        
                                                    
                            
हर सबब को,एक बहाना समझा उसने।।

ये घर भी, मेरे लिए क़फ़स से कम नहीं।
इसी क़फ़स को, ठिकाना समझा उसने।।
-यूनुस खान
एक महीने पहले
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