विज्ञापन

दिखता है

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जहां तक देखता हूं,वीराना दिखता है।
        
                                                    
                            
नयी रुत में, पुराना ज़माना दिखता है।।

कैफियत-ए-जाम , ना पूछो तो अच्छा।
हमें प्यासा यूं हर मयखाना दिखता है।।
-यूनुस खान
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

13403 कविताएं

View Profile

Dr fouzia

6944 कविताएं

View Profile