विज्ञापन

तपते हुए लबों की प्यास,मिटाने चला जाये।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तपते हुए लबों की प्यास,मिटाने चला जाये।
        
                                                    
                            
घर से दूर, कंही किसी मयखाने चला जाये।।

बड़े पुरखतर हो चले हैं , अब सन्नाटे घर के।
कहीं तन्हाई में, यूं वक्त बिताने चला जाये।।

अक्सर,हार से दिल को तस्कीन मिलती है।
इसीलिए तो, किसी को जिताने चला जाये।।

ये आइने भी , अब बेवफाई पर उतर आये।
दीवार पे लगे आईनों को,हटाने चला जाये।।
-यूनुस खान
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all