आज फिर हवाओं में
तिरंगे की सरसराहट हुई ,
आज फिर गलियों में
देशभक्ति की आहट हुई,
आज फिर गर्व से हर दिल कह उठा—
“हम आज़ाद हैं।"
पर कभी ठहरकर सोचा है— आखिर आज़ादी क्या है ?
क्या आज़ादी
सिर्फ़ बेड़ियों के टूटने का नाम है,
या आँखों में पलते सपनों का
बेख़ौफ़ मुकाम है?
या फिर अपने हिस्से का चुन पाना आसमान है,
क्या आज़ादी
आवाज़ उठाने का सिर्फ़ अधिकार है—
या दूसरे की आवाज़
सुनने का सलीका भी है?
हर कदम एक निर्णय है,
हर निर्णय एक ज़िम्मेदारी,
हमारी आज की राहें,
कल के भारत की तस्वीर हैं।
इसलिए अब सवाल यह नहीं
कि देश ने हमें क्या दिया,
सवाल यह है—
हम अपनी आज़ादी से
देश को क्या दे रहे हैं?
तो फिर बताओ
आख़िर आज़ादी क्या है—
शायद एक ईमानदार विचार,
किसी अनसुनी आवाज़ को
मिलती हुई पुकार,
किसी टूटते हौसले को
फिर जीने की आस,
सच के साथ खड़े रहने का साहस,
और गलत के सामने
उठता हुआ एक सवाल।
और शायद—
हर कदम एक कहानी है—
हर राह एक निशानी है,
आने वाला भारत
हमारे आज की लिखी कहानी है।
एक कदम मेरा,
एक कदम तुम्हारा,
यूँ ही सँवरता जाएगा
भारत हमारा।
-प्रियांशी यादव