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बहाने का मौसम

Waqil ahmad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस रात में मिलना गर हो तुम्हें,
        
                                                    
                            
उस रात का बहाना अच्छा है।
जो बात ज़ुबाँ से कह न सको,
जज़्बात का बहाना अच्छा है।
गर सामने आना मुश्किल हो तुम्हें,
मुलाक़ात का बहाना अच्छा है।
अश्कों से बयां हो हाल अगर,
बरसात का बहाना अच्छा है।
गर दिल की कसक कहनी हो कभी,
किसी बात का बहाना अच्छा है।
कोई पूछे जो दिल का हाल मेरा,
तेरी याद का बहाना अच्छा है।
गर इश्क़ हो मुझसे, शर्त है ये,
ज़रा दिल को जलाना अच्छा है।
गर दिल की खबर तुम तक पहुँचे,
इज़हार का बहाना अच्छा है।
-वकील अहमद रज़ा
1 सप्ताह पहले
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