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हम नींद से क्या जागे, हकीकत बदल गए।।

Vivek Barnwal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम जो थे तो सब संभल गए,
        
                                                    
                            
तुम गए और हम बिखर गए।।

वो तड़पता रहा रातभर जाग कर,
तुम अहले सुबह उठे और रूखसत हो गए।।

सारी उम्र बेवजह भटकता वो रहा,
फिर एक मकान मिला और किरदार बदल गए।।

कहते रहे हमसे अकेले रहोगे किस कदर,
जब हुए अलग-अलग हम और निखर गए।।

स्वाभिमान की जंग में हम यूं शिकस्त हुए,
उसने दी कातिल अदा और हम पिघल गए।।

सपने में भी जो देखा वो महज एक ख्वाब था,
हम नींद से क्या जागे, हकीकत बदल गए।।
4 दिन पहले
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