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एक उस की ही कमी है

Vinod

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यूँ ठहर जाए नज़र ही
        
                                                    
                            
हर अदा उस की पहर है
ज़िंदगी में और क्या है
सिर्फ़ उस का ही असर है

जान मेरी शान मेरी
एक वो पहचान मेरी
दिल उसी का जिस्म भी है
ज़िंदगी अरमान मेरी

चेहरा उस का यूँ खिला है
चाँद जैसे आ मिला है
इस जमी से है गगन को
बूँद पानी का मिला है

साथ होती तो ख़ुशी है
रौशनी ही रौशनी है
आज मेरी ज़िंदगी में
एक उस की ही कमी है
-विनोद गणेशपुरे
3 महीने पहले
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