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जब हम भी बादल बन जाते

Vinay Panday

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जन जीवन में होता गम, आंखों में चुपके आ जाते।
        
                                                    
                            
तपिश हृदय हर लेते हम, मन को शीतलता दे जाते।
बस बूंद बूंद बन ढलते जाते,
जब हम भी बादल बन जाते।
संघर्ष मार्ग पे राही थकते, सघन कुंज हो छा जाते।
कोई मां जब राह निहारे , उसके लिए संदेशा लाते।
सब पीड़ाओं को हर ले जाते,
जब हम भी बादल बन जाते।
बेघर प्राणी के हर सांसों में, उम्मीदों की खुशियां लाते।
प्यासे मन की हर आहों में, आते प्यास बुझाकर जाते।
अजय प्रेम से मन भर जाते।
जब हम भी बादल बन जाते
- विनय कुमार पाण्डेय "अजय"
 
2 दिन पहले
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