विज्ञापन

विश्वगुरु भारत

vinay anthwal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            विश्वगुरु था मेरा भारत
        
                                                    
                            
पावन सुखमय वसुधा में
ज्ञानालोक से आलोकित था
मेरा भारत वसुधा में।

ज्ञान यहाँ का आभूषण था
ज्ञान गंगा बहती थी।
भारत माता ही इस जग में
सबसे ऊपर रहती थी ।

दिव्यगुणों से सम्पन्न मानव,
भारत में ही रहते थे
सारे जग में केवल इसको,
देवभूमि भी कहते थे।

सबसे पहले ज्ञान का दीपक,
भारत ने जलाया था।
अन्धे जग को भारत ने ही,
ज्ञानमार्ग बताया था।

विश्वगुरु है भारत अब भी
मानव हम ही बदल गए
भारत भू में रह रहकर भी
हम खुद को ही अब भूल गए।

विशिष्ट मानव भारतवासी
हम जैसा कोई और नहीं
आर्षवंशज हैं हम सब ही
विश्वगुरु कोई और नहीं।

आज भी भारत चमक रहा है
सारे जग में निखर रहा है।
सद्ज्ञान का दीपक आज भी भारत
सारे जग में जला रहा है।
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7473 कविताएं

View Profile