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पहला ख़त

Vikash Tripathi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज मैंने फिर तुम पे अपना हक़ लिखा,
        
                                                    
                            
ख़ून के हर क़तरे से मैंने अपने प्यार का पहला ख़त लिखा।
हर लफ़्ज़ में तेरी ही खुशबू बसी रही,
हर पंक्ति में तेरे नाम का सजदा लिखा।
चाँद भी उतरा था मेरी तन्हा रातों में,
उसकी चाँदनी को मैंने तेरा पता लिखा।
मेरी हर दुआ का बस एक ही मतलब था,
रब की चौखट पर सिर्फ़ तेरा नाम लिखा।
जो दर्द मिला, उसे भी मुस्कुराकर सह लिया,
हर आँसू को मोहब्बत का सिलसिला लिखा।
दुनिया ने पूछा, इश्क़ की पहचान क्या है,
मैंने तेरे नाम को ही अपना ख़ुदा लिखा।
गर कभी पढ़ो मेरी ख़ामोश निगाहों को,
हर नज़र में बस तेरा इंतज़ार लिखा।
मोहब्बत अगर मुकम्मल न भी हो सकी,
फिर भी मैंने तुझे अपनी आख़िरी दुआ लिखा।

 
2 महीने पहले
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