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इंतज़ार की घड़ियाँ कैसे कटती हैं

Vikash Tripathi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इंतज़ार की घड़ियाँ कैसे कटती हैं,
        
                                                    
                            
जब मोहब्बत की फ़ज़ा में जाना मैंने...

एक-एक लम्हा जिया मैंने,
हर लम्हे में तुझे ही चाहा मैंने...

तेरे आने की आस में रातें कटीं,
हर रात तेरा ख़्वाब सजाया मैंने...

तू दूर रहा, फिर भी पास लगा,
हर धड़कन में तुझे पाया मैंने...

इश्क़ क्या है, ये तब समझ आया,
जब तुझमें खुद को भुलाया मैंने...
एक महीने पहले
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