विज्ञापन

वो कौन है

Vikas Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वो कौन है
        
                                                    
                            
जो मेरे भीतर मौन है
चेतना के द्वार पर
चित्त के उस पार
है जा खड़ा
शांत सरोवर सा शीतल
मधुर धवल
निर्मल अविचल ,
किंतु अतल सिंधु सम
जो लिए वलय अनंत
डूब ही जाऊं चिंतन में
भींगू संग
सघन घन में
मन मेरा
मरुसम प्यासा है
घुल बह जाने की
अभिलाषा है
लयलीन मिलूं
उस लय में
किंतु, जो मुझमें
मेरे भीतर है
क्योंकर उससे दूर हूं मै

क्या मैने ही स्वयं
गढ़ी मूरत उसकी
है सुंदर सुघड़
छवि जिसकी
जितने भी सुवर्णमई
रंग मिलजाते
उनसे मूरत रंग देता हूं
हूं निहारता फिर जी भर
पल में सारा
जीवन जी लेता हूं
साधक भी और
याचक भी
अनुरागी ,सेवक भी मै
किंतु, जो मुझमें
मेरे भीतर है
क्योंकर उससे दूर हूं मै

-विकास मोहन गुप्ता
5 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Aditya Mishra

1 कविता

View Profile

Anil Pandey

436 कविताएं

View Profile