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कली कली मुस्काई

Vikas Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            परी हो
        
                                                    
                            
गुलाबी पंखुड़ी से
घिरी हो जैसे
सुनहली
परी हो तुम

डली हो
मधुर मधुर
शीतल शीतल
मिश्री की
डली हो तुम

कली हो
ओस में भींगी
कोमल कुम्हलाई
अधखुली
कली हो तुम

भरी हो
तंग अंग
मधुरस यौवन के
मदरंग सुगंध से
भरी हो तुम

तुम भोर
नित्य तुम्हीं
लेती अंगड़ाई
गली गली उपवन
तुमसे ही
कली कली मुस्काई

सांझ ढली
कुंतल बिखराती
नित निशा चांदनी
जीवन संग लाती
आंगन जब
आंचल ढलकाती

तुम संगिनी
रंगी रंगीनी
संग मेरे तुम
मन भीतर
भरी हो तुम
- विकास मोहन गुप्ता
1 सप्ताह पहले
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