विज्ञापन

उड़ान ऊँची है मेरे सपनों की

Vijay Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उड़ान ऊँची है मेरे सपनों की,
        
                                                    
                            
जीत अभी बाकी है मेरे अरमानों की।

हवाओं के रुख को अब मोड़ना है मुझे,
किस्मत की जंजीरों को तोड़ना है मुझे।
लोग कहते हैं कि यह सफर बहुत कठिन है,
पर नामुमकिन हर ख्वाब को सच करना है मुझे।

मंजिलें पुकारती हैं दूर आसमान से,
रिश्ता है मेरा अब तो हर इम्तिहान से।
तप रहा हूँ धूप में तो क्या हुआ मेरे दोस्त,
छाँव बनेगी कल मेरे इसी पसीने के निशान से।

रोशनी की तलाश में खुद दिया बन गया हूँ,
तितलियों के पीछे चलना कब का छोड़ दिया हूँ।
अब तो बाज़ की तरह आसमान नापना है,
चीर कर हर हद को नया मुकाम पाना है।

रात भर जागकर जो एक दीप जलाया है,
मैंने खुद अपनी किस्मत को नया मोड़ दिलाया है।
तूफानों की जिद थी जहाँ आंधियाँ चलाने की,
मैंने भी वहीं पर अपना आशियाना बनाया है।

लकीरों के भरोसे बैठना अब छोड़ दिया मैंने,
अपने हाथों से अपनी तकदीर को मोड़ दिया मैंने।
वक़्त चाहे कितना भी इम्तिहान ले मेरा,
हर मुश्किल को अपनी जीत से निचोड़ दिया मैंने।
2 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Nathuram Kaswan

8652 कविताएं

View Profile

SATYENDRA KUMAR

117 कविताएं

View Profile