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छिपा हुआ भय

Ved Prakash

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जनरल की हां में बस स्वीकृति है,
        
                                                    
                            
और उसकी ना में एक गहरा मौन,
जहां उसकी शक्ति के आगे
हमारे प्रश्न भी हो जाते हैं गौण,
तो फिर इन वैश्विक यात्रा का
अर्थ ही क्या रह जाता है ?

हमारी असली पहचान तो
हमारी अपनी स्वतंत्र चेतना है,
न कि किसी और की सत्ता का विस्तार,
फिर क्यों हर पल
हमारे स्वाभिमान को किया जाता है आहत ?
क्या इसका कारण कहीं भीतर
छिपा वह भय तो नहीं ?

पर हमें यह सत्य नहीं भूलना चाहिए कि
राष्ट्र न भय की नींव पर टिकता है,
न संबंधों के दबाव में बंधता है,
वह स्वाभिमान से उठता है,
शक्ति से संवरता है,
और आत्मविश्वास से आगे बढ़ता है।
-- वेद प्रकाश तिवारी
3 महीने पहले
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