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बची रहेगी कविता

Ved Prakash

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब तक यह सृष्टि है,
        
                                                    
                            
तब तक सांस लेगी कविता

समय के साथ समाप्त हो जाएंगे
धन, पद, प्रतिष्ठा
और दुनिया के सारे ऐश्वर्य
ढह जाएंगे
बड़े-बड़े महलों के दंभ,
फिर भी बची रहेगी कविता

जब तक किसी हृदय में
करुणा का एक कण शेष है,
जब तक प्रेम
हार मानने से इंकार करता रहेगा,
जब तक सत्य के पक्ष में
कोई अकेला खड़ा होने का साहस रखेगा,
जब तक मनुष्य के भीतर
मनुष्यता जीवित रहेगी,
तब तक बची रहेगी कविता
सृष्टि के आख़िरी छोर तक ।

-- वेद प्रकाश तिवारी
3 महीने पहले
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