किसने कहा कि लड़के रोते नहीं?
किसने कहा कि लड़के रोते नहीं?
कभी पिता बनकर अपनी बेटी की विदाई पर रो पड़ते हैं, तो कभी अपनी बहन की याद में आँसू बहाते हैं। भले ही ऊपर से कहते हैं, "अब इसे अपने घर ले जाओ," लेकिन भीतर ही भीतर बहुत रोते हैं।
किसने कहा कि लड़के रोते नहीं?
कभी प्रेमिका के बिछड़ने पर रोते हैं, तो कभी अपने प्रियजनों के वियोग में आँसू बहाते हैं। किसने कहा कि लड़के रोते नहीं?
कभी राजा दशरथ बनकर पुत्र-वियोग में रोते हैं, तो कभी भगवान शिव बनकर सती के दाह पर विलाप करते हैं।
किसने कहा कि लड़के रोते नहीं?
हो सकता है कि लड़के अपने आँसू दुनिया को न दिखाएँ, लेकिन उनके भीतर दर्द का समंदर उमड़ता रहता है।
कभी परिवार की जिम्मेदारियों का बोझ उठाकर रोते हैं, तो कभी अपने भविष्य की चिंता में रातें आँसुओं के साथ बिताते हैं। फिर भी लोग कहते हैं— "लड़के रोते नहीं।"
समाज कहता है कि जो लड़का रोता है, वह कमजोर या लड़कियों जैसा है। यदि ऐसा है, तो मेरा समाज से एक प्रश्न है—
क्या रोना केवल लड़कियों का अधिकार है?
आख़िर किसने कहा कि लड़के रोते नहीं?