वेदों से आलोकित जीवन
चार दिशाओं में चार वेदों ने, ज्ञान-सूर्य का तेज जगाया,
ऋषियों के निर्मल अंतर्मन ने, श्रुति का अमृत-स्वर पाया।
ऋक्, साम, यजुः, अथर्व—चारों, ज्ञान-दिशाएँ बनकर आए,
सत्य, कर्म, संगीत और जीवन का, गूढ़ रहस्य समझाया।
काल बदलता रहा, सनातन ज्ञान सदा पथ पर लाया है—
चारों वेदों ने जीवन का, सच्चा मर्म बताया है॥
दस मंडल के मंत्र-सूक्तों ने, उषा-अग्नि के रूप निखारे,
इंद्र, वरुण, सोम और सूर्य, प्रकृति के सब रूप सँवारे।
एक सत्य को ज्ञानी जन ने, भिन्न-भिन्न नामों से पुकारा,
सृष्टि-सूक्त ने मौन गगन में, अनगिन गहरे प्रश्न विचारे।
ऋग्वेद ने जिज्ञासा का दीप, मानव-मन में जलाया है—
चारों वेदों ने जीवन का, सच्चा मर्म बताया है॥
ऋचाओं ने जब सुर को पहना, सामगान बन नभ में छाया,
ऋषियों के कंठों से उठकर, यज्ञ-स्थल में नाद समाया।
शब्द अकेले अर्थ बताते, सुर ने उनमें भाव जगाए,
सामवेद ने मंत्र और सुर का, मधुर मिलन करवाया।
सुर और लय ने अंतर्मन का, सोया भाव जगाया है—
चारों वेदों ने जीवन का, सच्चा मर्म बताया है॥
अग्निकुंड में आहुति पड़ते, त्याग-भाव मन में भर आया,
मंत्रों के संग विधि जुड़ी तो, कर्म ने अनुशासन पाया।
शुक्ल और कृष्ण रूपों ने, यज्ञ-विधान का मर्म सँवारा,
देना भी जीवन का उत्सव, यजुर्वेद ने यह समझाया।
लोकहितों से जुड़े कर्म को, सच्चा धर्म बताया है—
चारों वेदों ने जीवन का, सच्चा मर्म बताया है॥
पृथ्वी-सूक्त ने ममता से, धरती को माता बतलाया,
वन-औषधि, आरोग्य और शांति का, ज्ञान जनों तक आया।
घर-आँगन से राजधर्म तक, जीवन के सब सूत्र सँवारे,
अथर्ववेद ने लोकजीवन का, कल्याण-पथ दिखलाया।
सबके सुख की चाह ने ही, जीवन सफल बनाया है—
चारों वेदों ने जीवन का, सच्चा मर्म बताया है॥
संहिता में मंत्र बसे हैं, ब्राह्मण ने कर्म-विधान निहारा,
आरण्यक की शांत साधना ने, चिंतन का संसार सँवारा।
उपनिषदों ने प्रश्न उठाए—कौन आत्मा, सत्य कहाँ है?
अंतर में ही ब्रह्म खोजकर, ज्ञान ने काटा भ्रम सारा।
श्रवण, मनन और आत्मचिंतन ने, भीतर दीप जलाया है—
चारों वेदों ने जीवन का, सच्चा मर्म बताया है॥
सूरज, धरती, जल और वायु को, ऋषियों ने आदर से अपनाया,
प्रकृति और मानव के रिश्ते का, संतुलित व्यवहार सिखाया।
लेना उतना ही धरती से, जितना जीवन हेतु जरूरी,
आने वाली हर पीढ़ी का, अधिकार हमें याद दिलाया।
संयम ने ही मानव का, भविष्य सदा बचाया है—
चारों वेदों ने जीवन का, सच्चा मर्म बताया है॥
‘साथ चलो, संवाद करो’—यह मंत्र मनों को पास ले आया,
भिन्न विचारों को भी मिलकर, एक दिशा का बोध कराया।
श्रेष्ठ विचार सभी दिशाओं से, खुले हृदय तक आते जाएँ,
ज्ञान बाँटने से बढ़ता है, वेदों ने यह राज बताया।
सहमति और सहयोग ने ही, समाज सदा महकाया है—
चारों वेदों ने जीवन का, सच्चा मर्म बताया है॥
चार दिशाओं के चार दीपों ने, भारत का आँगन सजाया,
ज्ञान, कला, सत्कर्म, आरोग्य—एक सूत्र में बाँध दिखाया।
वेद न केवल बीते युग के, पन्नों में सोए अक्षर हैं,
इनका सत्य जिया जिसने भी, उसने जीवन-सत्य कमाया।
बाहर जितना खोजा जग को, भीतर उतना पाया है—
चारों वेदों ने जीवन का, सच्चा मर्म बताया है॥
—संतोष कुमार शर्मा