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तेरी रंगत के आगे ये कलियां है क्या

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            स्वरचित -- राकेश कुमार तिवारी
        
                                                    
                            
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तेरी रंगत के आगे ये कलियां है क्या
हर नज़ाकत में बिखरा तेरा नूर है।

देख पाता नहीं आंख भर के तुझे
क्या करूं दिल मेरा कितना मजबूर हैं।

पास होकर भी छूने से डरता हूं मैं
ये भी शायद मोहब्बत का दस्तूर है।

मुस्कुरा कर जो देखा तूने एक दफा
अब तो लगता है बंदा ये मशहूर है।।।।
 
6 दिन पहले
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