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स्वादों का हिंदुस्तान

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            स्वादों का हिंदुस्तान
        
                                                    
                            

जम्मू-कश्मीर की वादी महके,
केसर-कहवा मन बहलाए।
लद्दाख़ का थुकपा भाप उठाए,
बर्फ़ीली रातें गर्म बनाए॥

हिमाचल की धाम सजे तो,
देव-पर्व का रंग चढ़ाए।
उत्तराखंड की बाल मिठाई,
पर्वत की मिठास जगाए॥

पंजाब में लोहड़ी दहके,
साग-मक्की संग प्यार बढ़ाए।
हरियाणा की बाजरे-रोटी,
लस्सी संग मुस्कान सजाए॥

घाटी, पर्वत, खेत बदलते,
स्वाद मगर रिश्ते पहचाने।
हर थाली की अलग कहानी,
फिर भी खुशबू हिंदुस्तानी॥

दिल्ली की गलियों में महके,
छोले-कुलचे रंग जमाएँ।
चंडीगढ़ के चोले-भटूरे,
पंजाब-हरियाणा मेल कराएँ॥

उत्तर प्रदेश में होली आए,
गुझिया घर-घर नेह बढ़ाए।
राजस्थान की दाल-बाटी,
चूरमा मरुधर स्वाद जगाए॥

मध्य प्रदेश की पोहा-जलेबी,
सुबह-सुबह मुस्कान सजाए।
गुजरात का उंधियू महके,
उत्तरायण का रंग चढ़ाए॥

बोली बदले, भेष बदलते,
भोजन दिल से दिल मिलवाए।
हर थाली की अलग कहानी,
फिर भी खुशबू हिंदुस्तानी॥

महाराष्ट्र में बप्पा आएँ,
मोदक का जब भोग चढ़ाए।
गोवा की बेबिंका मीठी,
शिगमो के संग रंग सजाए॥

दादरा-नगर हवेली, दमन-दीव,
वन-सागर का मेल दिखाएँ।
छत्तीसगढ़ का चीला-फरा,
धान-धरा की शान बढ़ाएँ॥

बिहार में छठ का सूरज उतरे,
ठेकुआ श्रद्धा साथ सजाए।
झारखंड का धुस्का महके,
वन-माटी का स्वाद जगाए॥

चूल्हे बदलें, आँच बदलती,
माटी अपना रंग मिलाए।
हर थाली की अलग कहानी,
फिर भी खुशबू हिंदुस्तानी॥

बंगाल में दुर्गा माँ आएँ,
भोग की खिचड़ी नेह बढ़ाए।
ओडिशा का महाप्रसाद भी,
जगन्नाथ का भाव जगाए॥

सिक्किम के मोमो की भापें,
पर्वत का अपनापन लाएँ।
असम में बिहू संग पीठा,
उत्सव की मिठास बढ़ाएँ॥

मेघालय की जादोह थाली,
पहाड़ी पहचान बताए।
अरुणाचल के मोमो-थुकपा,
भोर की गर्माहट लाए॥

पूरब की हर राह निराली,
स्वाद सभी को पास बुलाएँ।
हर थाली की अलग कहानी,
फिर भी खुशबू हिंदुस्तानी॥

नागालैंड के धुएँ के व्यंजन,
अपनी परंपरा महकाएँ।
मणिपुर की इरोम्बा थाली,
धरती के अहसास जगाएँ॥

मिज़ोरम की सादी-सी बाई,
हरियाली का स्वाद सुनाए।
त्रिपुरा की मुई बोरोक भी,
अपनी माटी पास बुलाए॥

आंध्र का पुलिहोरा महके,
उगादी नव उल्लास जगाए।
तेलंगाना की सकिनालु,
संक्रांति का मान बढ़ाए॥

दूर भले हों राहें इनकी,
स्वाद सभी को पास बुलाएँ।
हर थाली की अलग कहानी,
फिर भी खुशबू हिंदुस्तानी॥

कर्नाटक की बिसी बेले भात,
मैसूर पाक मिठास बढ़ाए।
तमिलनाडु का पोंगल महके,
गन्ना-चावल संग मुस्काए॥

केरल में ओणम जब आए,
सद्या केले-पात सजाए।
पुडुचेरी की थाली मिलकर,
तमिल-फ़्रांसीसी रंग दिखाए॥

लक्षद्वीप में नारियल महके,
सागर अपनी बात सुनाए।
अंडमान-निकोबार की थाली,
द्वीपों का संसार सजाए॥

सागर, पर्वत, खेत अलग हों,
सब अपनी सौगात लुटाएँ।
हर थाली की अलग कहानी,
फिर भी खुशबू हिंदुस्तानी॥

ईद की सेवइयाँ जब महकें,
दीवाली की मिठाई आए।
गुरुपर्व का लंगर बैठे,
क्रिसमस अपना केक खिलाए॥

खाना केवल भूख नहीं है,
रिश्तों का सम्मान पुराना।
एक निवाला साथ जो बाँटें,
अपना लगता हर अनजाना॥

थाली छोटी पड़ जाए शायद,
भारत के पकवान बड़े।
नाम अलग हों, स्वाद अलग हों,
फिर भी सारे साथ खड़े॥

रोटी बाँटो, रिश्ते जुड़ते,
यही हमारी रीत पुरानी।
हर थाली की अलग कहानी,
फिर भी खुशबू हिंदुस्तानी॥
— संतोष कुमार शर्मा
 
एक महीने पहले
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