सुना है
कभी
कॉफ़ी की महक
दूर तक फैला करती थी
कॉफी हाउस की बातें भी
पहुंचती थी दूर तक।
यहां की बौद्धिक बहसें,
हिला देती थीं
सिंहासन,
सवालों के घेरे में
खड़ा कर देतीं थीं
सत्ता को।
कहा जाता है..
यहां काफी के प्यालों से ज्यादा
गर्म होती थी बहसें
और शब्दों में
हुआ करती थीं चिंगारी.
सुना है कॉफी हाउस में
सिर्फ काफी नहीं मिलती थी,
यहां मिलते थे...
विचार,
असहमति,
संवाद
और
बेहतर दुनिया के
सपने.