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रोटी पचा रहे हैं

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रोज नई घटनाएं हो रहीं,और देश है रोता ।
        
                                                    
                            
पेपर लीक कराकर चोमू,देखो चैन से सोता।।

फिर भी ये गद्दी पर बैठे,
देश को चला रहे हैं।।
जाने कौन-सा चूरन खा के,
रोटी पचा रहे हैं।।

नये-नये वादों से ये,भारत को विकसित करते।
बारह साल हो गए सत्ता में,पर प्रश्नों से डरते।

धर्म -जाति को लड़वाकर,
सरकारें बना रहे हैं।
जाने कौन-सा चूरन खा के,
रोटी पचा रहे हैं।।

रूपया गिरने का कारण ये,डाॅलर को बतलाते।
देख दुर्दशा जनता की ,ये बिल्कुल ना घबराते।।

दो लोकों का खुद को ये ,
बस स्वामी बना रहे हैं।
जाने कौन-सा चूरन खा के,
रोटी पचा रहे हैं।।

महबूबा से मिलने को,ये हैं विदेश में जाते।
अर्थव्यवस्था गिरे नहीं,इसलिए टाॅफी ले जाते।।

इटली जाकर देखो ये,
मेलोडी खिला रहे हैं।।
जाने कौन-सा चूरन खा के,
रोटी पचा रहे हैं।।
3 महीने पहले
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