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पूरी दुनिया — एक छोटी-सी धरती

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नीले नभ की चादर ओढ़े,
        
                                                    
                            
धरती मुस्काती है,
कहीं बर्फ़ की चोटी चमके,
कहीं नदी गीत सुनाती है।
कहीं समुद्र की लहरें उठतीं,
कहीं रेगिस्तान सोता है,
कहीं जंगल साँसें लेते,
कहीं फूलों का मौसम होता है।
कहीं शहर रात में जगते,
रोशनियों के तारों जैसे,
कहीं गाँव की पगडंडी पर
चलते लोग सरल मन जैसे।
कहीं सूरज पहले उगता,
कहीं शाम देर से आती,
फिर भी एक ही आसमान के नीचे
हर सुबह नई कहानी गाती।
कहीं मंदिर की घंटी बजती,
कहीं मस्जिद से आवाज़ आती,
कहीं चर्च की घंटियाँ गूँजें,
कहीं प्रार्थना मन को भाती।
भाषाएँ लाखों, चेहरे अनगिनत,
फिर भी सपने सबके अपने,
किसी को चाहिए शांति दुनिया में,
किसी को बस दो पल के सपने।
पक्षी सीमा जानते नहीं,
हवा पासपोर्ट रखती नहीं,
नदियाँ देश नहीं पूछतीं,
धरती किसी से भेद करती नहीं।
इस दुनिया में दुख भी है,
और हँसी के मेले भी,
आँखों में आँसू मिलते हैं,
और खुशी के उजले रेले भी।
कितनी बड़ी है ये दुनिया,
फिर भी लगती छोटी है—
जब कोई किसी का हाथ थाम ले,
तो दूरी खुद ही खो जाती है।
एक धरती, एक आसमान,
एक सूरज, एक चाँद,
अलग-अलग हैं हम सब फिर भी
एक ही कहानी के किरदार।
काश ये दुनिया समझ सके,
नफ़रत से कुछ मिलता नहीं—
धरती सबकी माँ है,
और इसका कोई दूसरा घर नहीं।
एक दिन पहले
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