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मेरे पिताजी की पुरानी चप्पल

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            घर के जूतों के रैक में रखी थी,
        
                                                    
                            
मेरे पिताजी की पुरानी चप्पल,
वो देखने लगती थी बहुत पुरानी, गन्दी सी,
रंग उड़ चुका था, तला घिसा हुआ था उसका,
फिर भी मानो हमारी जान थी वह चप्पल,
जिसने हमें दुनिया से लड़ना सिखाया,
हमारी जरूरतों को पूरा कर हमे नयी पहचान दिलायी,
ये चप्पल सिर्फ़ मेरा पिताजी के संघर्ष,
और मेहनत का प्रतीक ही नहीं, बल्कि,
उनकी हिम्मत और लगन की पहचान है।
-: आकांक्षा गुप्ता
एक महीने पहले
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