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मैं रोकर फिर जीने लगता हूं

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब आंखों में सावन ठहरा हो
        
                                                    
                            
और बाहर मौसम सूखा हो,
जब मन के भीतर शोर बहुत हो
और होठों पर सन्नाटा हो,
जब खुद से मिलने बैठूं तो
खुद से भी मिलना मुश्किल हो,

तब आंखों में आंसू के बाढ़ अचानक आते हैं
और भीतर के भार बहा ले जाते हैं
मैं रोकर फिर जीने लगता हूं
और दुनियां बाले कायर कहते रहते हैं।।।।
- राकेश कुमार तिवारी 
3 दिन पहले
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