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माँ के हाथ की रोटी

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बहुत याद आती है, माँ तुम्हारी हाथ की रोटी की,
        
                                                    
                            
तुम्हारे हाथ की रोटी के हर निवाले में प्यार बसता था,
माँ तुम्हारे हाथ की रोटी में जो सुकून और सहज था,
वह होटल और रेस्टोरेंट की रोटी में कहां?
माँ तुम जो करती फिकर हमारी,
तभी तो रोटी खत्म होने से पहले,
थाली में आ जाती दूसरी रोटी,
हमारे मना करने पर भी एक ओर खा ले बेटा,
कह कह कर हमे एक रोटी ओर खिलाती,
तभी बड़े होकर समझ आया, मां बिना संसार अधूरा है।
- आकांक्षा गुप्ता
एक महीने पहले
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