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याद रखो इस जीवन-पथ पर

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कर्मों का सिद्धांत जगत में
        
                                                    
                            
कभी न झुठलाया जाए;
जैसा बोए मानव जग में,
वैसा ही फल पाए।
प्रकृति सिखाती हर क्षण हमको
जीवन का व्यवहार;
धूप के पीछे छाँव चली है,
दुःख के पीछे प्यार।
सागर से जल लेकर बादल
अंबर में छा जाता;
बरस-बरसकर वही जल फिर
सागर में मिल जाता।
यही प्रकृति का शाश्वत क्रम है,
युग-युग से अविराम;
एक-दूसरे पर निर्भर होकर
चलता सारा धाम।
फिर क्यों इतना अहं मनुज को?
किस बात का अभिमान?
जो स्वयं को सबसे छोटा माने,
वही बने महान।
दीपक बनकर स्वयं जलो तुम,
जग में ज्योति बिखेरो;
सत्कर्मों की राह पकड़कर
जीवन सफल करो।
सेवा, सत्य और सदाचार
जीवन का आधार;
इनके पथ पर जो भी चलता,
होता वही उदार।
याद रखो इस जीवन-पथ पर
धन-दौलत रह जाए;
अंत समय में मानव के संग
केवल कर्म ही जाए।
यश, पद, वैभव सब मिट जाते,
समय बदलता जाए;
पर सत्कर्मों की सुगंध सदा,
पीढ़ी-दर-पीढ़ी महकाए।
-नीरजा वकील नीर
एक दिन पहले
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