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अक्सर मुझे ज़िंदगी का ख़ज़ाना याद आता है,

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अक्सर मुझे ज़िंदगी का ख़ज़ाना याद आता है,
        
                                                    
                            
माँ की आँखों में प्यार का समंदर याद आता है।
सुबह उठते ही पापा का अख़बार पढ़ना याद आता है,
शाम को सबका साथ बैठकर खिलखिलाना याद आता है।
मेरी एक फ़रमाइश पर माँ का खाना बनाना याद आता है,
सर्दी में स्कूल न जाने का बहाना याद आता है।
स्कूल की किताबों के बीच वो पंख छुपाना याद आता है,
दोस्त के टिफ़िन में से कक्षा में पकौड़े खाना याद आता है।
अक्सर माँ की लोरी और कहानियों का ज़माना याद आता है,
परीक्षा पास होने पर लड्डुओं का भोग लगाना याद आता है।
आज भीड़ में भी ख़ुद को अकेला महसूस करती हूँ,
पर बचपन में भाई का शोर और बहन का चिढ़ाना याद आता है।
थोड़े किस्मत वाले भी तो थे हम,
कि कभी माँ का थप्पड़ और पापा का डाँटना भी याद आता है।
जाने वो मोती कहाँ बिखर गए,
भागती हुई इस ज़िंदगी में वो ज़माना भी याद आता है।
अक्सर मुझे बचपन याद आता है...
अक्सर मुझे बचपन याद आता है...
एक महीने पहले
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