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ऐ मेरे वतन

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ऐ मेरे वतन तू कहाँ जा रहा है
        
                                                    
                            
हमें पीछे छोड़कर कहाँ जा रहा हैं
कहाँ गया वो प्यार देशप्रेम और रिश्ते
इन सब को छोड़कर कहाँ जा रहा है
कहाँ गए वो देशवासी
जो अच्छों का सत्कार और बुरों का धिकार करते थे
जो दिवाली गुरपुरब और ईद पर एक दूसरे से प्यार करते थे
दिखावा कम था और सादगी से जीवन निर्वाह करते थे

इस झूठी उन्नति ने हमसे
बहुत कुछ छीन लिया है
हमारा सकुन्न और हमारा प्यार
छीन लिया है

हमारी साफ़ ज़मीन और आसमाँ छीन लिया है

चलो फिर से वही प्यार से जी लें हम
एक दूसरे के त्योहार में ख़ुशी से झूम लें हम
चलो फिर से एक सुंदर समाज का निर्माण करें हम
तरक्की के साथ-साथ अपने दिलों को भी साफ़ करें हम। 
2 महीने पहले
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Dn Chaubey

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