विज्ञापन

बूंदो का मिलन- ये सावन

User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कितना सुहाना है बूंदो का जमी से मिलन,, डूब गया ये समा मस्तियों में।
        
                                                    
                            
फ़िज़ा कब से प्यासी थी,,कुछ रूठी सी कुछ खामोश भी थी,
पहली बूंद के चुंबन से आलिंगन का वो सिलसिला शुरू हुआ कि अब न जमी को ज़माने की फिकर न बूंदों को वजूद का हिसाब।।
हर बूंद ने खुद को मिटा कर बसा लिया मिट्टी की खुशबू में अपना जहां।
चलो, हम भी डूब जाए इस अनकहे प्रेम के दायरे में,
जहाँ हर ओर गुल ही गुल हो,, और हर मंजर गुलजार।।
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7473 कविताएं

View Profile