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अंजान शहर में अपना सा कुछ

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आई थी इस अनजाने शहर में
        
                                                    
                            
बहुत सारे सपने लेकर,
आज जो जा रही हूँ वापस
तो जा रही हूँ यादें लेकर।
आने से पहले सोचा था,
कैसे रहूँगी, क्या करूँगी,
दोस्त भी बनेंगे मेरे
या फिर अकेली रहूँगी?
पर अब जब जा रही हूँ यहाँ से,
तो हैं वही ढेर सारी यादें,
याद है कैसे आई थी मैं
पहले दिन इस शहर में।
आज जब जाने को आई हूँ,
तो शायद यही बातें याद रहेंगी,
जो कभी अनजान था मेरे लिए,
वही शहर अपनी-सी यादें बनकर रहेगा।
एक दिन पहले
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Ankit Kumar

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