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तुमसे मिलने की कोई चाह नही

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब तुम से मिलने की कोई चाह नही।
        
                                                    
                            
बेतुकी शिकायतों में रही अफवाह नही।।

बस तुम्हारी यादो से रिश्ता बाकी मेरा।
मेरी बेचैनी भी हकीकत में स्याह नही।।

मैं जानता तुमको मेरा ख्याल कितना।
मुस्कुरा लेना उससे बेहतरीन वाह नही।।

कुछ रिश्ते खत्म नही होते खामोश रहते।
खामोशी में 'उपदेश' जुदाई गुनाह नही।।

मिलेगे जरूर किसी मोड़ पर अगर हम।
कह सकते हो तो कह दो कोई राह नही।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
2 सप्ताह पहले
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