विज्ञापन

सुकून के पल 'उपदेश' मेरे आँचल में बुन।।

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बाहर घटाओं का शोर-ओ-गुल लेकिन।
        
                                                    
                            
तेरे नगमें गुनगुनाती अन्दर धड़कने सुन।।

भींगी मिट्टी की खुशबू आनंदित करती।
करीब से मेरी जुल्फों का आनंद तूँ गुन।।

तेरे होंठ मेरे होंठो पर मिल जाए अगर।
गर्म तेवर पर अमृत की बौछार जैसे छुन।।

तूँ पास रहे तो हर लम्हा हंसी-खुशी बीते।
दिल को करार आए ऐसी घड़ी को चुन।।

फिर कुछ देर तक मेरी आगोशी में ठहर।
सुकून के पल 'उपदेश' मेरे आँचल में बुन।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
2 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Brijesh saroj

1 कविता

View Profile