विज्ञापन

खुशियों का अद्भुत समुन्दर फैला हमारा लगता

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर हाल में सेम रहना कहने में अच्छा लगता।
        
                                                    
                            
मन में हो विश्वास तो एक तारा सहरा लगता।।

दुख के घने अँधेरे बादलो ने जब मुझको घेरा।
दुख की भँवर में घूमता रहा दूर किनारा लगता।।

चिन्ताओं से घिरे अम्बर में गर तुम मिल जाओ।
दुष्चक्र हालातों में प्रभाव तुम्हारा प्यारा लगता।।

पतझड़ में भी मन का मौसम हरियाली फैलाए।
कितने भी गम आएं जाएं स्पर्श सहारा लगता।।

बहते रहना 'उपदेश' मंत्र है खुशहाली का राज।
खुशियों का अद्भुत समुन्दर फैला हमारा लगता।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
5 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Powari Bhasha

333 कविताएं

View Profile

Anil Pandey

416 कविताएं

View Profile