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महसूस होने लगी एक सन्तान की जरूरत।।

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नौकरी जरूरत या धंधा-पानी जरूरत।
        
                                                    
                            
जिम्मेदारियां आते ही माया की जरूरत।।

दोस्ती अपनी जगह रिश्ते अपनी जगह।
अनजान शहर में रही कमरे की जरूरत।।

गुजारा करते सोचा नही सुख चैन खोकर।
यादों में हिस्सा माँगते पेरेंट्स की जरूरत।।

हर एक युवा इस दौर से गुजरता 'उपदेश'।
गुज़र बसर के साथ मोहब्बत की जरूरत।।

चाहते बढ़ती ही जाती अपने छूटने लगते।
महसूस होने लगी एक सन्तान की जरूरत।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक महीने पहले
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